मदनकामेश्वरप्रादुर्भावः
Manifestation of Madana-Kāmeśvara
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे उत्तरभागे हयग्रीवागस्त्यसंवादे ललितोपाख्याने मदनकामेश्वरप्रादुर्भावो नाम चतुर्दशो ऽध्यायः तच्छ्रुत्वा वचनं देवी मन्दस्मितमुखांबुजा / उवाच स ततो वाक्यं ब्रह्मविष्णुमुखान्सुरान्
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe uttarabhāge hayagrīvāgastyasaṃvāde lalitopākhyāne madanakāmeśvaraprādurbhāvo nāma caturdaśo 'dhyāyaḥ tacchrutvā vacanaṃ devī mandasmitamukhāṃbujā / uvāca sa tato vākyaṃ brahmaviṣṇumukhānsurān
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के उत्तरभाग में, हयग्रीव और अगस्त्य के संवाद में, ललितोपाख्यान के अंतर्गत ‘मदनकामेश्वर-प्रादुर्भाव’ नामक चौदहवाँ अध्याय है। यह वचन सुनकर मंद मुस्कान-युक्त मुख-कमल वाली देवी ने ब्रह्मा-विष्णु आदि देवताओं से कहा।