ललिताप्रादुर्भाव-स्तुति
Lalita’s Cosmic Praise and Body–Cosmos Correspondences
क्रीडा ते लोकरचना सखा ते चिन्मयः शिवः / आहारस्ते सदानन्दो वासस्ते हृदये सताम्
krīḍā te lokaracanā sakhā te cinmayaḥ śivaḥ / āhāraste sadānando vāsaste hṛdaye satām
तेरी क्रीड़ा ही लोक-रचना है; तेरा सखा चैतन्यमय शिव है। तेरा आहार सदा-आनन्द है; और सत्पुरुषों के हृदय में तेरा निवास है।