ललिताप्रादुर्भाव-स्तुति
Lalita’s Cosmic Praise and Body–Cosmos Correspondences
दृशश्चन्द्रार्कदहना दिशस्ते बाहवोंबिके / मरुतस्तु तवोच्छ्वासा वाचस्ते श्रुतयो ऽखिलाः
dṛśaścandrārkadahanā diśaste bāhavoṃbike / marutastu tavocchvāsā vācaste śrutayo 'khilāḥ
हे अम्बिके! चन्द्र, सूर्य और अग्नि तेरी दृष्टियाँ हैं; दिशाएँ तेरी भुजाएँ हैं। पवन तेरा श्वास है और समस्त श्रुतियाँ तेरी वाणी हैं।