Bhaṇḍāsuraprādurbhāva
Rise and Consecration of Bhaṇḍāsura
तया विलोकिताः सद्यस्ते सर्वे विगतज्वराः / संपूर्णाङ्गा दृढतरा वज्रदेहा महाबलाः / तुष्टुवुश्च महादेवीमंबिकामखिलार्थदाम्
tayā vilokitāḥ sadyaste sarve vigatajvarāḥ / saṃpūrṇāṅgā dṛḍhatarā vajradehā mahābalāḥ / tuṣṭuvuśca mahādevīmaṃbikāmakhilārthadām
देवी के देखते ही वे सब तुरंत ज्वर-रहित हो गए। उनके अंग पूर्ण, देह वज्र-सी दृढ़ और बल महान हो गया। तब उन्होंने समस्त अभिलाषाएँ देने वाली महादेवी अम्बिका की स्तुति की।