मोहिनी-प्रादुर्भावः (Mohinī’s Manifestation) — Narrative Prelude to the Bhandāsura Cycle
स शैलो नारदाच्छ्रुत्वा रुद्राणीति स्वकन्याकाम् / तस्य शुश्रूषणार्थाय स्थापयामास चान्तिके
sa śailo nāradācchrutvā rudrāṇīti svakanyākām / tasya śuśrūṣaṇārthāya sthāpayāmāsa cāntike
उस पर्वतराज ने नारद से सुनकर कि उसकी कन्या ‘रुद्राणी’ है, उसकी सेवा के लिए उसे (शंकर के) समीप स्थापित कर दिया।