मोहिनी-प्रादुर्भावः (Mohinī’s Manifestation) — Narrative Prelude to the Bhandāsura Cycle
आत्मानमात्मना पश्यञ्ज्ञानानन्दरसात्मकः / उपास्यमानो मुनिभिरद्वन्द्वगुणलक्षणः
ātmānamātmanā paśyañjñānānandarasātmakaḥ / upāsyamāno munibhiradvandvaguṇalakṣaṇaḥ
वह अपने आत्मा से आत्मा को देखता है, ज्ञान और आनन्द-रस का स्वरूप है। मुनियों द्वारा उपासित, वह द्वन्द्व-रहित गुणों से युक्त है।