Amṛta-Manthana and Lalitā’s Mohinī Intervention
Amṛtamanthana-Prasaṅga
तं दृष्ट्वाप्यसुरास्तत्र तूष्णीमासन्विमोहिताः / एवं क्रमेण तत्सर्वं विबुधेभ्यो वितीर्य सा / असुराणां पुरः पात्रं सानिनाय तिरोदधे
taṃ dṛṣṭvāpyasurāstatra tūṣṇīmāsanvimohitāḥ / evaṃ krameṇa tatsarvaṃ vibudhebhyo vitīrya sā / asurāṇāṃ puraḥ pātraṃ sānināya tirodadhe
यह देखकर भी वहाँ असुर मोहित होकर मौन बैठे रहे। उसने इसी क्रम से सब कुछ देवताओं को बाँट दिया; फिर असुरों के सामने पात्र ले जाकर वह अंतर्धान हो गई।