Mānasasṛṣṭi-varṇana (Account of Mind-born Creation) | मानससृष्टिवर्णनम्
निकृत्यनृतयोर्जज्ञ भयं नरक एव च / माया च वेदना चापि मिथुनद्वयमेतयोः
nikṛtyanṛtayorjajña bhayaṃ naraka eva ca / māyā ca vedanā cāpi mithunadvayametayoḥ
कपट और असत्य से भय तथा नरक उत्पन्न हुए; और इनके युगल रूप में माया तथा वेदना भी प्रकट हुईं।