Mānasasṛṣṭi-varṇana (Account of Mind-born Creation) | मानससृष्टिवर्णनम्
द्वाराण्येतानि चैवास्य विहितानि स्वयंभुवा / यान्याः शिष्टा यवीयस्य एकादश सुलोचनाः
dvārāṇyetāni caivāsya vihitāni svayaṃbhuvā / yānyāḥ śiṣṭā yavīyasya ekādaśa sulocanāḥ
ये ही उसके द्वार स्वयंभू ने नियत किए; और जो शेष रहीं, वे कनिष्ठ की ग्यारह सु-लोचना कन्याएँ थीं।