लोकज्ञान-वर्णन (Lokajñāna-varṇana) — Description of World-Knowledge / Cosmogonic Classification
पक्षिणस्तु स सृष्ट्वा वै ततः पशुगणान्सृजन् / मुखतोजाः सृजन्सो ऽथ वक्षसश्चाप्यवीः सृजन्
pakṣiṇastu sa sṛṣṭvā vai tataḥ paśugaṇānsṛjan / mukhatojāḥ sṛjanso 'tha vakṣasaścāpyavīḥ sṛjan
उसने पहले पक्षियों की सृष्टि की; फिर पशुओं के समूह रचे। फिर मुख से बकरियाँ और वक्षस्थल से भेड़ें उत्पन्न कीं।