लोकज्ञान-वर्णन (Lokajñāna-varṇana) — Description of World-Knowledge / Cosmogonic Classification
भूतत्वात्ते रमृता भूताः पिशाचा पिशिताशनात् / गायतो गां ततस्तस्य गन्धर्वा जज्ञिरे सुताः
bhūtatvātte ramṛtā bhūtāḥ piśācā piśitāśanāt / gāyato gāṃ tatastasya gandharvā jajñire sutāḥ
भूतत्व के कारण वे ‘भूत’ कहलाए, और मांसभक्षण के कारण ‘पिशाच’; फिर उसके गान करते हुए (गायन से) गन्धर्व पुत्र उत्पन्न हुए।