लोकज्ञान-वर्णन (Lokajñāna-varṇana) — Description of World-Knowledge / Cosmogonic Classification
ययासृष्टास्तु पितरस्तां तनुं स व्यपोहत / सापविद्धा तनुस्तेन सद्यः संध्या व्यजायत
yayāsṛṣṭāstu pitarastāṃ tanuṃ sa vyapohata / sāpaviddhā tanustena sadyaḥ saṃdhyā vyajāyata
जिस देह से पितर रचे गए थे, उस देह को उसने त्याग दिया। उसके द्वारा परित्यक्ता वह देह तत्क्षण संध्या के रूप में उत्पन्न हुई।