Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
ओङ्काराषृतनुं त्वन्यां कल्पादिषु यथा पुरा / ततो महात्मा मनसा दिव्यरूपम चिन्तयत्
oṅkārāṣṛtanuṃ tvanyāṃ kalpādiṣu yathā purā / tato mahātmā manasā divyarūpama cintayat
जैसे पूर्व कल्पों के आरम्भ में उन्होंने ओंकार-आश्रित अन्य तनु धारण की थी, वैसे ही तब उस महात्मा ने मन में दिव्य रूप का चिन्तन किया।