Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
प्राणाद्दक्षो ऽसृजद्वाचं चक्षुर्भ्यां च मरीचिनम् / भृगुश्च हृदयाज्जज्ञे ऋषिः सलिलयोनिनः
prāṇāddakṣo 'sṛjadvācaṃ cakṣurbhyāṃ ca marīcinam / bhṛguśca hṛdayājjajñe ṛṣiḥ salilayoninaḥ
प्राण से दक्ष ने वाणी को रचा, और नेत्रों से मरीचि को; तथा हृदय से भृगु ऋषि उत्पन्न हुए, जिनकी योनि जल है।