Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
स्थानात्मनः स सृष्ट्वा तु ततो ऽन्यान्स तदासृजत् / देवांश्चैव पितॄंश्चैव यौरिमा वर्द्धिताः प्रजाः
sthānātmanaḥ sa sṛṣṭvā tu tato 'nyānsa tadāsṛjat / devāṃścaiva pitṝṃścaiva yaurimā varddhitāḥ prajāḥ
उसने पहले ‘स्थान-स्वरूप’ तत्त्व की सृष्टि की; फिर उसी समय अन्य (सृष्टियाँ) रचीं—देवों को और पितरों को भी, जिनके द्वारा ये प्रजाएँ बढ़ीं।