Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
शार इत्येव शीर्णे तु नानार्थो धातु रुच्यते / एकर्णवे ततस्तस्मिन्नष्टे स्थावर जङ्गमे / तदा भवति स ब्रह्मा सहस्राक्षः सहस्रपात्
śāra ityeva śīrṇe tu nānārtho dhātu rucyate / ekarṇave tatastasminnaṣṭe sthāvara jaṅgame / tadā bhavati sa brahmā sahasrākṣaḥ sahasrapāt
‘शार’ धातु ‘शीर्ण’ (क्षीण) अर्थ में अनेक प्रकार से कही जाती है। जब उस एकमात्र प्रलय-सागर में स्थावर-जंगम सब नष्ट हो गए, तब वही ब्रह्मा सहस्र नेत्रों और सहस्र चरणों वाले हुए।