Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
तस्मिन् युगसहस्रान्ते संस्थिते ब्रह्मणो ऽहनि / तावत्कालं रजन्यां च वर्तन्त्यां सलिलात्मनः
tasmin yugasahasrānte saṃsthite brahmaṇo 'hani / tāvatkālaṃ rajanyāṃ ca vartantyāṃ salilātmanaḥ
उस युग-सहस्र के अंत में, जब ब्रह्मा का दिन समाप्त होता है, उतने ही काल तक ब्रह्मा की रात्रि में भी सब कुछ जल-स्वरूप ही रहता है।