Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
वक्त्राद्यस्य ब्राह्मणाः संप्रसूता वक्षसश्चैव क्षत्रियाः पूर्वभागे / वैश्या ऊरुभ्यां यस्य पद्भ्यां च शूद्राःसर्वेवर्णा गात्रतः संप्रसूताः
vaktrādyasya brāhmaṇāḥ saṃprasūtā vakṣasaścaiva kṣatriyāḥ pūrvabhāge / vaiśyā ūrubhyāṃ yasya padbhyāṃ ca śūdrāḥsarvevarṇā gātrataḥ saṃprasūtāḥ
जिसके मुख से ब्राह्मण उत्पन्न हुए, जिसके वक्ष के अग्रभाग से क्षत्रिय; जिसकी जंघाओं से वैश्य और जिसके चरणों से शूद्र—उसके शरीर से ही समस्त वर्ण प्रकट हुए।