Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
अव्यक्तबीजप्रभवस्तस्यैवानुग्रहे स्थितः / बुद्धिस्कन्धमयश्चैव इन्द्रियान्तरकोटरः
avyaktabījaprabhavastasyaivānugrahe sthitaḥ / buddhiskandhamayaścaiva indriyāntarakoṭaraḥ
वह अव्यक्त बीज से उत्पन्न होकर उसी की अनुग्रह-शक्ति में स्थित है; बुद्धि उसका स्कन्ध है और इन्द्रियों के भीतर का कोटर उसका आश्रय है।