ततः सोमस्य वचनाज्जगृहुस्ते प्रचेतसः / संत्दृत्य कोपं वृक्षेभ्यः पत्नीं धर्मेण मारिषाम्
tataḥ somasya vacanājjagṛhuste pracetasaḥ / saṃtdṛtya kopaṃ vṛkṣebhyaḥ patnīṃ dharmeṇa māriṣām
तब सोम के वचन से उन प्रचेताओं ने, वृक्षों के प्रति क्रोध को संयमित कर, मारीषा को धर्मपूर्वक पत्नी रूप में ग्रहण किया।