Pṛthivī-dohaṇa (The Milking of the Earth) and the Praise of King Pṛthu
स घोररूपात्संग्रामात्क्षेमी तरति कीर्त्तिमान् / वैश्यैरपि च राजर्षिर्वेश्यवृत्तिमिहास्थितैः
sa ghorarūpātsaṃgrāmātkṣemī tarati kīrttimān / vaiśyairapi ca rājarṣirveśyavṛttimihāsthitaiḥ
वह कीर्तिमान पुरुष उस घोर संग्राम से कुशलपूर्वक पार हो जाता है; और यहाँ वैश्यवृत्ति में स्थित वैश्यों द्वारा भी राजर्षि (पृथु) वंदित हैं।