मन्वन्तरानुक्रमवर्णनम् (Enumeration of Manvantara Cycles) — with focus on Svārociṣa Manvantara
एकस्यार्थाय यो हन्यादात्मनो वा परस्य च / एकं प्राणी बहून्वापि कर्म तस्यास्ति पातकम्
ekasyārthāya yo hanyādātmano vā parasya ca / ekaṃ prāṇī bahūnvāpi karma tasyāsti pātakam
जो अपने या पराए के एक के लाभ के लिए एक प्राणी को या बहुतों को भी मारता है, उसका वह कर्म पाप है।