व्यासशिष्योत्पत्तिवर्णन (Origins/Enumeration of Vyāsa’s Disciplic Succession) — Chapter on Vedic Transmission Lineages
अर्यम्णो दक्षिणं ये तु पितृयानं समाश्रिताः / दाराग्निहोत्रिणस्ते वै यै प्रजाहेतवः स्मृताः
aryamṇo dakṣiṇaṃ ye tu pitṛyānaṃ samāśritāḥ / dārāgnihotriṇaste vai yai prajāhetavaḥ smṛtāḥ
जो अर्यमा के दक्षिण मार्ग—पितृयान—का आश्रय लेते हैं, वे दार और अग्निहोत्र सहित गृहस्थ ही प्रजा के कारण माने गए हैं।