युगप्रजालक्षणम् ऋषिप्रवरवर्णनं च
Yuga–Prajā-Lakṣaṇa and the Enumeration of Eminent Ṛṣis
अथवार्थे परिप्राप्ते हिनो तेर्गतिकर्मणा / तथा निर्वचनं ब्रूयाद्वाक्यार्थस्यावधारणम्
athavārthe pariprāpte hino tergatikarmaṇā / tathā nirvacanaṃ brūyādvākyārthasyāvadhāraṇam
अथवा जब अर्थ स्पष्ट रूप से प्राप्त हो, तब ‘हिन्’ धातु का प्रयोग गमन-क्रिया के अर्थ में समझो। इसी प्रकार निर्वचन कहकर वाक्य के अर्थ का निश्चय करना चाहिए।