युगप्रजालक्षणम् ऋषिप्रवरवर्णनं च
Yuga–Prajā-Lakṣaṇa and the Enumeration of Eminent Ṛṣis
यः कश्चित्पादवान्मध्ये प्रयुक्तो ऽक्षर संपदा / विनियुक्तावसानां तु तामृचं परिचक्षते
yaḥ kaścitpādavānmadhye prayukto 'kṣara saṃpadā / viniyuktāvasānāṃ tu tāmṛcaṃ paricakṣate
जो मंत्र पादों सहित हो और अक्षरों की समृद्धि से बीच में व्यवस्थित हो, तथा नियत समाप्ति वाला हो—उसे ‘ऋक्’ कहा जाता है।