युगप्रजालक्षणम् ऋषिप्रवरवर्णनं च
Yuga–Prajā-Lakṣaṇa and the Enumeration of Eminent Ṛṣis
ऋषिपुत्रवचस्तद्वै सर्वाश्च परिदेवताः / हेतुदृष्टान्त बहुलं चित्रशब्दमपार्थकम्
ṛṣiputravacastadvai sarvāśca paridevatāḥ / hetudṛṣṭānta bahulaṃ citraśabdamapārthakam
वह ऋषिपुत्रों का वचन है, और सब ‘परिदेवता’ (उपदेव) भी; जो कारण और दृष्टान्तों से भरा, विचित्र शब्दों वाला, परन्तु अर्थहीन हो।