चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
तथा विवृत्तो ह्यव्यक्तात्खद्योत इव सञ्ज्वलन् / स माहन्सशरीरस्तु यत्रैवायमवर्त्तत
tathā vivṛtto hyavyaktātkhadyota iva sañjvalan / sa māhansaśarīrastu yatraivāyamavarttata
उसी प्रकार अव्यक्त से वह जुगनू की भाँति दीप्त होकर प्रकट हुआ; और वह महान्, शरीर सहित, वहीं स्थित हुआ जहाँ यह प्रवृत्त हुआ था।