चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
संसिद्धकार्यकरणः सद्य एव व्यवर्त्तत / यथोल्मुकात्तु त्रुटयः एककालाद्भवन्ति हि
saṃsiddhakāryakaraṇaḥ sadya eva vyavarttata / yatholmukāttu truṭayaḥ ekakālādbhavanti hi
कार्य-करण से पूर्ण वह तत्क्षण ही प्रवृत्त हुआ; जैसे जलते अंगारे से चिंगारियाँ एक ही क्षण में निकल पड़ती हैं।