चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
गुणसाम्ये वर्त्तमाने सर्वसंप्रलये तदा / अविभागे तु वेदानामनिर्देश्ये तमोमये
guṇasāmye varttamāne sarvasaṃpralaye tadā / avibhāge tu vedānāmanirdeśye tamomaye
जब गुणों की समता में स्थित होकर सर्वसंप्रलय होता है, तब वेद भी अविभक्त रहते हैं—वह अवस्था अवर्णनीय, तमोमयी होती है।