चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
कुशलाकुशलानां तु प्रहाणं न्यास उच्यते / व्यक्ता ये विशेषास्ते विकारे ऽस्मिन्नचेतने
kuśalākuśalānāṃ tu prahāṇaṃ nyāsa ucyate / vyaktā ye viśeṣāste vikāre 'sminnacetane
शुभ और अशुभ—दोनों का परित्याग ही ‘न्यास’ कहा जाता है; जो भेद प्रकट होते हैं, वे इस अचेतन विकार में ही हैं।