चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
आक्रुष्टो निहतो वापि नाक्रोशेद्यो न हन्ति च / वाङ्मनःकर्मभिर्वेत्ति तितिक्षैषा क्षमा स्मृता
ākruṣṭo nihato vāpi nākrośedyo na hanti ca / vāṅmanaḥkarmabhirvetti titikṣaiṣā kṣamā smṛtā
गाली दी जाए या मारा भी जाए, तो भी न गाली दे, न हिंसा करे; वाणी-मन-कर्म से सहन करे—इसी तितिक्षा को ‘क्षमा’ कहा गया है।