चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
ऋचो यजूंसामानि ब्रह्मणो ऽङ्गानि च श्रुतिः / मन्वन्तरस्यातीतस्य स्मृत्वाचारान्मनुर्जगौ
ṛco yajūṃsāmāni brahmaṇo 'ṅgāni ca śrutiḥ / manvantarasyātītasya smṛtvācārānmanurjagau
ऋक्, यजुः और साम—ये श्रुति ब्रह्म के अंग हैं। अतीत मन्वन्तर के आचारों को स्मरण करके मनु ने उनका प्रतिपादन किया।