चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
तथा सातिशयस्छैव मानुषः काय उच्यते / इत्येते वै परिक्रान्ता भावा ये दिव्यमानुषाः
tathā sātiśayaschaiva mānuṣaḥ kāya ucyate / ityete vai parikrāntā bhāvā ye divyamānuṣāḥ
उसी प्रकार अतिशय-युक्त मनुष्य भी ‘काय’ कहा जाता है; इस प्रकार ये दिव्य-मानुष भाव (स्वभाव) परिक्रान्त (वर्णित) किए गए हैं।