चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
एते मन्त्रकृतश्चैव वैश्यानां प्रवराः स्मृताः / इत्येषा नवतिः प्रोक्ता मन्त्रा यैरृषिभिः कृताः / ब्राह्यणाः क्षत्रिया वैश्या ऋषिपुत्रान्निबोधत
ete mantrakṛtaścaiva vaiśyānāṃ pravarāḥ smṛtāḥ / ityeṣā navatiḥ proktā mantrā yairṛṣibhiḥ kṛtāḥ / brāhyaṇāḥ kṣatriyā vaiśyā ṛṣiputrānnibodhata
ये ही वैश्य-समुदाय के मंत्रकृत और श्रेष्ठ प्रवर माने गए हैं। इस प्रकार ऋषियों द्वारा रचित मंत्रों की यह नब्बे की संख्या कही गई। हे ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यो, ऋषिपुत्रों को नाम सहित जानो।