चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
इत्येते ऋषिकाः प्रोक्तास्ते सत्यादृषितां गताः / ईश्वरा ऋषयश्चैव ऋषिकाश्चैव ते स्मृताः
ityete ṛṣikāḥ proktāste satyādṛṣitāṃ gatāḥ / īśvarā ṛṣayaścaiva ṛṣikāścaiva te smṛtāḥ
इस प्रकार ये ऋषिक कहे गए; वे सत्य-दर्शन की ऋषिता को प्राप्त हुए। वे ईश्वरस्वरूप ऋषि और ऋषिक—ऐसे स्मरण किए जाते हैं।