यज्ञप्रवर्तनम् (Yajña-pravartana) — The Institution/Commencement of Sacrifice in Dvāpara
अव्याकर्ता क्रूरवाक्या नार्जवो नानसूयकः / न कृते प्रतिकर्त्ता च युगे क्षीणे भविष्यति
avyākartā krūravākyā nārjavo nānasūyakaḥ / na kṛte pratikarttā ca yuge kṣīṇe bhaviṣyati
युग के क्षीण होने पर लोग उत्तर न देने वाले, कठोर वचन बोलने वाले, सरलता से रहित और ईर्ष्या से भरे होंगे; उपकार का प्रत्युपकार करने वाला कोई न रहेगा।