यज्ञप्रवर्तनम् (Yajña-pravartana) — The Institution/Commencement of Sacrifice in Dvāpara
आद्ये कृते यो धर्मो ऽस्ति स त्रेतायां प्रवर्त्तते / द्वापरे व्याकुलीभूत्वा प्रणश्यति कलौ युगे
ādye kṛte yo dharmo 'sti sa tretāyāṃ pravarttate / dvāpare vyākulībhūtvā praṇaśyati kalau yuge
आदि कृतयुग में जो धर्म है, वही त्रेता में चलता है; द्वापर में वह व्याकुल होकर क्षीण होता है और कलियुग में नष्ट हो जाता है।