Saṃkhyāvarta (संख्यावर्त्त): Commencement of Yajña at the Dawn of Tretāyuga
वसोर्वाक्यमना दृत्य जगमुः सर्वे यथागतम् / गतेषु मुनिसंघेषु देवा यज्ञं समाप्नुवन्
vasorvākyamanā dṛtya jagamuḥ sarve yathāgatam / gateṣu munisaṃgheṣu devā yajñaṃ samāpnuvan
वसु की बात की अवहेलना करके वे सब जैसे आए थे वैसे ही लौट गए। मुनि-समूहों के चले जाने पर देवताओं ने यज्ञ पूर्ण किया।