Bhūtasarga-Prakaraṇa
Account of Elemental Creation from Avyakta to Mahat
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते पूर्वभागे प्रथमे प्रक्रियापादे नैमिषाख्यानकथनं नाम द्वितीयो ऽध्यायः सूत उवाच शृणु तेषां कथां दिव्यां सर्वपापप्रमोचनीम् / कथ्यमानां मया चित्रां बह्वर्थां श्रुतिसंमताम्
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte pūrvabhāge prathame prakriyāpāde naimiṣākhyānakathanaṃ nāma dvitīyo 'dhyāyaḥ sūta uvāca śṛṇu teṣāṃ kathāṃ divyāṃ sarvapāpapramocanīm / kathyamānāṃ mayā citrāṃ bahvarthāṃ śrutisaṃmatām
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायुप्रोक्त पूर्वभाग के प्रथम प्रक्रियापाद में ‘नैमिषाख्यानकथन’ नामक दूसरा अध्याय। सूत बोले—उनकी दिव्य कथा सुनो, जो समस्त पापों का नाश करने वाली है; जिसे मैं विचित्र, बहुअर्थपूर्ण और श्रुति-सम्मत रूप से कह रहा हूँ।