Yuga-Vibhāga and Kāla-Pramāṇa
Measures of Time and the Four Yugas
त्दृष्टपुष्टाः प्रजाः सर्वा अरोगाः पूर्णमानसाः / एको वेदश्चतुष्पादस्त्रेतायुगविधौस्मृतः
tdṛṣṭapuṣṭāḥ prajāḥ sarvā arogāḥ pūrṇamānasāḥ / eko vedaścatuṣpādastretāyugavidhausmṛtaḥ
तब सारी प्रजा दृष्टि से पुष्ट, निरोग और पूर्ण-मन वाली होती है; और त्रेता-युग की विधि में वेद एक होकर भी चार पादों वाला माना गया है।