Amāvasyā-Pitṛtarpaṇa: Purūravas and the Soma-Based Ancestral Offering (अमावस्या-पितृतर्पण / सोमतर्पण-विधि)
सायाह्ने ऽह्यनुमत्यादौ कालो द्विलव उच्यते / लवौ द्वावेव राकायां कालो ज्ञेयो ऽपराह्णकः
sāyāhne 'hyanumatyādau kālo dvilava ucyate / lavau dvāveva rākāyāṃ kālo jñeyo 'parāhṇakaḥ
सायंकाल में, अनुमति आदि तिथि के आरम्भ पर, समय दो ‘लव’ कहा गया है। और राका (पूर्णिमा) में दो ही लव को अपराह्न-काल जानना चाहिए।