Amāvasyā-Pitṛtarpaṇa: Purūravas and the Soma-Based Ancestral Offering (अमावस्या-पितृतर्पण / सोमतर्पण-विधि)
कृष्णपक्षे यथा वेन्दोः कलाः पञ्चदश क्रमात् / पिबन्त्यंबुमयं देवास्त्रयस्त्रिंशत्तु छन्दनाः
kṛṣṇapakṣe yathā vendoḥ kalāḥ pañcadaśa kramāt / pibantyaṃbumayaṃ devāstrayastriṃśattu chandanāḥ
जैसे कृष्णपक्ष में चन्द्रमा की पंद्रह कलाएँ क्रमशः घटती हैं, वैसे ही छन्दन नामक तैंतीस देव जलमय अंश का पान करते हैं।