Amāvasyā-Pitṛtarpaṇa: Purūravas and the Soma-Based Ancestral Offering (अमावस्या-पितृतर्पण / सोमतर्पण-विधि)
कुहूमात्रः कलां चैव ज्ञात्वोपास्ते कुहूं तथा / स तदा तामुपासीनः कालापेक्षः प्रपश्यति
kuhūmātraḥ kalāṃ caiva jñātvopāste kuhūṃ tathā / sa tadā tāmupāsīnaḥ kālāpekṣaḥ prapaśyati
कुहूमात्रा और कला को जानकर वह वैसे ही कुहू की उपासना करता है। तब वह उसकी उपासना में बैठा, समय की प्रतीक्षा करते हुए देखता रहता है।