Nīlakaṇṭha-nāmotpatti-kathana
Origin of the Epithet “Nīlakaṇṭha”
त्वं धाता त्वं च कर्तासि त्वं लोकान्सृजसि प्रभो / त्वत्प्रसादाच्च कल्याणं प्राप्तं त्रैलोक्यमव्ययम्
tvaṃ dhātā tvaṃ ca kartāsi tvaṃ lokānsṛjasi prabho / tvatprasādācca kalyāṇaṃ prāptaṃ trailokyamavyayam
हे प्रभो! आप ही धाता हैं, आप ही कर्ता हैं, आप ही लोकों की सृष्टि करते हैं; आपकी कृपा से अव्यय त्रैलोक्य को कल्याण प्राप्त हुआ है।