Nīlakaṇṭha-nāmotpatti-kathana
Origin of the Epithet “Nīlakaṇṭha”
एकधा बहुधा देव लोकानां प्रभवाप्ययः / आदित्या वसवो रुद्रा मरुतश्च सहाश्विनः
ekadhā bahudhā deva lokānāṃ prabhavāpyayaḥ / ādityā vasavo rudrā marutaśca sahāśvinaḥ
हे देव! एक होकर भी अनेक रूपों में लोकों की उत्पत्ति और लय तुमसे ही है; आदित्य, वसु, रुद्र, मरुत तथा अश्विन—सब तुम ही हो।