Nīlakaṇṭha-nāmotpatti-kathana
Origin of the Epithet “Nīlakaṇṭha”
संहर्त्ता सर्वलोकानां कालो मृत्युमयोंऽतकः / त्वं धारयसि लोकांस्त्रींस्त्वमेव सृजसि प्रभो
saṃharttā sarvalokānāṃ kālo mṛtyumayoṃ'takaḥ / tvaṃ dhārayasi lokāṃstrīṃstvameva sṛjasi prabho
हे प्रभो! तुम ही समस्त लोकों के संहर्ता, मृत्यु-स्वरूप काल, अंतक हो; तुम ही तीनों लोकों को धारण करते हो और तुम ही सृजन करते हो।