कृष्णाजिनधरं देवं कमण्डलुविभूषितम् / निमेषान्तरमात्रेण प्राप्तो ऽसौ पुरुषोत्तमः
kṛṣṇājinadharaṃ devaṃ kamaṇḍaluvibhūṣitam / nimeṣāntaramātreṇa prāpto 'sau puruṣottamaḥ
कृष्ण मृगचर्म धारण किए, कमण्डलु से विभूषित उस देव को वह पुरुषोत्तम एक निमेष के भीतर ही प्राप्त हो गया।