ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
नक्षत्राणि च सर्वाणि नक्षत्राणि विशन्त्युत / गृहाण्येतानि सर्वाणि ज्योतींषि सुकृतात्म नाम्
nakṣatrāṇi ca sarvāṇi nakṣatrāṇi viśantyuta / gṛhāṇyetāni sarvāṇi jyotīṃṣi sukṛtātma nām
सभी नक्षत्र अपने-अपने नक्षत्र-स्थानों में प्रवेश करते हैं। ये सभी ग्रह-स्थान पुण्यात्माओं के लिए ज्योतिर्मय गृह बनते हैं।