ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
विशन्ति सर्वदेवास्तु स्थानान्येतानि सर्वशः / मन्वन्तरेषु सर्वेषु ऋक्षसूर्यग्रहाश्रयाः
viśanti sarvadevāstu sthānānyetāni sarvaśaḥ / manvantareṣu sarveṣu ṛkṣasūryagrahāśrayāḥ
सभी देवता सर्वत्र इन-इन स्थानों में प्रवेश करते हैं; और प्रत्येक मन्वन्तर में वे नक्षत्रों, सूर्य तथा ग्रहों के आश्रय से युक्त रहते हैं।