ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
बह्वर्थश्चदिरित्येष ह्लादने धातुरुच्यते / शुक्लत्वे चामृतत्वे च शीतत्वे च विभाव्यते
bahvarthaścadirityeṣa hlādane dhāturucyate / śuklatve cāmṛtatve ca śītatve ca vibhāvyate
‘चदि’ नामक यह धातु अनेक अर्थों वाला है और ह्लादन (आनन्द) का बोध कराता है; यह श्वेतता, अमृतत्व और शीतलता में भी प्रकट माना जाता है।